Sunday, May 7, 2023

क्या भगवान कृष्ण असली हैं?


 भारतीय संस्कृति के अनेक विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कथाओं में भगवान कृष्ण को एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरित्र माना जाता है। उन्हें हिंदू धर्म के आठ अवतारों में से एक माना जाता है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या भगवान कृष्ण असली हैं?

विवेकानंद के अनुसार भगवान कृष्ण के अस्तित्व के बारे में कहा जाता है कि वह असली नहीं होते। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्म इतिहास में नहीं हुआ था बल्कि उन्हें एक लेखक द्वारा रचित महाकाव्य महाभारत में जन्म दिया गया था।

Saturday, May 6, 2023

गीता में कितने मुख्य कर्म बताए गए हैं ?




    भगवद गीता भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है जो श्री कृष्णा द्वारा महाभारत के युद्ध के समय अर्जुन को दिया गया उपदेशों का संग्रह है। गीता में कर्म और उनसे जुड़ी समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई है। यह एक महत्वपूर्ण विषय है जो हमारी जीवनशैली और धर्म को समझने में मदद करता है।

गीता में कर्म के विभिन्न प्रकार बताए गए हैं जो हमें समझने में मदद करते हैं कि हमें कैसे कर्म करने चाहिए और क्या उनके परिणाम होते हैं। गीता में अनेक कर्मों का उल्लेख है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण
निम्नलिखित कर्म हैं।

मरने के बाद 13 दिन तक क्या होता है?

 


हिंदू धर्म के अनुसार मनुष्य की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा अपने शरीर से अलग होती है और उसे अन्य लोकों में जाना पड़ता है। इस समय जब आत्मा शरीर से अलग होती है तो शरीर के रूप में उसे उपयोगी रखा जाता है। यह अंतिम संस्कार होता है जिसे हिंदू धर्म में "अंतिम संस्कार" या "अंत्येष्टि" कहा जाता है।

अंत्येष्टि के बाद, मरे हुए व्यक्ति के परिजन और दोस्तों को उसकी आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रयास करने की जरूरत होती है। इसके लिए आमतौर पर 13 दिनों का शोकावसर रखा जाता है।

क्या मृत्यु पहले से ही तय होती है ?

 


"मृत्यु" इस संसार के सभी जीवों के लिए एक निश्चित तथ्य है। हर कोई जन्म लेता है और अंत में मृत्यु के बल पर यहाँ से जाता है। यह सच है कि मृत्यु पहले से ही तय होती है या नहीं यह बहुत सारे लोगों के दिमाग में एक सवाल उठता है। यह एक दुखद तथ्य है कि हम सभी अपने अंतिम समय का अनुमान नहीं लगा सकते हैं लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि मृत्यु की तारीख पहले से ही तय होती है।

हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि हर जीव मृत्यु के बाद फिर से जन्म लेता है, जो कर्मों के आधार पर निर्धारित होता है। इस तथ्य से सिद्ध होता है कि मृत्यु का समय पहले से ही तय होता है। इसी तरह जैन धर्म में भी मृत्यु की तारीख पहले से ही तय होती है। इसमें यह मान्यता है कि हमारे कर्मों और उनके परिणामों का निर्धारण उस समय होता है जब हम इस दुनिया में जन्म लेते हैं।

Friday, May 5, 2023

क्या आप जानते हैं ज्यादा पूजा पाठ करने से क्या होता है?




पूजा और ध्यान करना धार्मिक विश्वास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इनका पालन करना शांति और स्थिरता का एक स्रोत है। लेकिन कभी-कभी लोग इन धार्मिक क्रियाओं में इतना लीन हो जाते हैं कि उनका दैनिक जीवन प्रभावित होता है। यह आध्यात्मिक अभ्यास उनकी दैनिक जीवनशैली में तनाव, चिंता और दुख का कारण बन सकता है।

प्रारम्भिक संकेत शांतिपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन अधिक पूजा या ध्यान करने से व्यक्ति के अन्तःकरण में अन्तरंग टकराव हो सकता है। यह तकनीकी रूप से व्यक्ति के शरीर और मन के साथ काम करता है और उन्हें समस्याओं से निपटने के लिए आध्यात्मिक शक्तियों का उपयोग करता है। लेकिन इस विधि का अधिक उपयोग करने से शरीर और मन में तनाव बढ़ सकता है जो लंबे समय तक शांति नहीं मिलता है।

गीता के अनुसार दुख का कारण क्या है


 

भगवद गीता भारतीय धर्म और दार्शनिक विचारधारा का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। गीता में अनेक विषयों पर चर्चा की गई है, लेकिन दुख और उसके कारण एक महत्वपूर्ण विषय है। गीता में दुख का कारण बताया गया है और उसके समाधान के लिए भी उपाय बताए गए हैं।

गीता में दु:ख का कारण आसक्ति या मोह है। अपनी आसक्तियों और मोहों से लोग सुख और दुःख  दोनों का अनुभव करते हैं। आसक्ति एक ऐसी अवस्था है जिसमें हम अपने विषयों को प्रिय और अप्रिय के रूप में विभाजित करते हैं। हम जो भी विषयों से आसक्त होते हैं, उनसे हमारी आकांक्षाएं और अपेक्षाएं जुड़ जाती हैं। इसलिए, आसक्ति हमारे दुख का मूल कारण है।

Thursday, May 4, 2023

क्या आप जानते हैं भगवद गीता के अनुसार शरीर क्या है ?






भगवद गीता हमें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के लिए उत्तेजित करती है। इस ग्रंथ में जीवन के अनेक महत्वपूर्ण विषय हैं, जिनमें शरीर की भूमिका भी शामिल है। शरीर के सम्बन्ध में गीता की शिक्षाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

भगवद गीता में शरीर को एक आवास के समान बताया गया है। जैसे कि जीव को आवास की आवश्यकता होती है वैसे ही शरीर भी जीव को उसके धर्मपरायण जीवन को निर्वाह करने के लिए आवश्यक होता है। गीता में शरीर को नश्वर बताया गया है, जो अर्थात जो नश्वर होता है, वह कभी अमर नहीं होता है। इसलिए, शरीर को स्थायी माना नहीं जाता है।भगवद गीता में शरीर के अलावा जीव और परमात्मा के बीच भी एक संबंध बताया गया है। गीता के अनुसार, शरीर जीव का एक मात्र आवास होता है और जीव परमात्मा का ही अंश होता है। इसलिए, शरीर के सम्बन्ध में ज्ञान का उपदेश दिया जाता है कि शरीर को धार्मिक नियमों और संस्कृति के अनुसार नियंत्रित किया जाना चाहिए, ताकि जीव अपने जीवन के उद्देश्य को पूरा कर सके। गीता में शरीर के साथ-साथ उसकी देखभाल और संरक्षण का भी जिक्र है। शरीर को उचित भोजन, आहार, विश्राम और व्यायाम की आवश्यकता होती है। इसलिए, गीता शरीर की सुव्यवस्थित देखभाल को महत्वपूर्ण बताती है।

भगवद गीता का ज्ञान क्या है?





भगवद गीता का ज्ञान क्या है?

भारतीय संस्कृति अनेक प्रकार के धर्मों के जीवन और मार्गदर्शन को समेटे हुए है। इनमें से एक धर्म है हिंदू धर्म जो भारत के मूल धर्म है। हिंदू धर्म का अध्ययन करते समय भगवद गीता नाम की पवित्र ग्रंथ का जिक्र होता है। यह ग्रंथ भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को महाभारत के युद्ध के समय उनके धर्म के ज्ञान को समझाने के लिए बताया गया है। भगवद गीता का ज्ञान हमारे जीवन में कुछ महत्वपूर्ण सिखावट भरा है।

भगवद गीता का मूल संदेश जीवन के उद्देश्य को समझाना है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को अपने कर्तव्य का पालन करने के लिए प्रेरित किया। भगवद गीता में कर्म और धर्म की महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। यह ज्ञान हमें उस रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है, जो दुखों से मुक्ति दिलाता है।भगवद गीता का ज्ञान हमें असत्य से दूर ले जाता है और सत्य के प्रति प्रेरित करता है।

Tuesday, May 2, 2023

क्या आपको पता है हमें भगवद गीता कब नहीं पढ़नी चाहिए ?




भगवद गीता हमारी संस्कृति और धर्म का मूल आधार है। यह एक प्रेरणादायक ग्रंथ है जो हमें जीवन के सभी पहलुओं में निर्देशित करता है। हम सभी जानते हैं कि गीता एक धार्मिक ग्रंथ है, लेकिन कुछ लोगों का मानना होता है कि उन्हें इसे पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। इस लेख में हम बताएंगे कि हमें भगवद गीता कब नहीं पढ़नी चाहिए।

अज्ञानी होने की स्थिति में - भगवद गीता हमें ज्ञान का पाठ देती है। इसलिए, जब तक हम ज्ञान के आधार पर नहीं चलते, हमें गीता को नहीं पढ़ना चाहिए।

घर में गीता का पाठ करने से क्या होता है ?


 

भारतीय संस्कृति में गीता जैसी महत्वपूर्ण ग्रंथों का बहुत महत्व होता है। गीता को महाभारत के युद्ध कांड में विशेष महत्ता दी गई है और इसे धर्मग्रंथ के रूप में माना जाता है। गीता का पाठ न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए बल्कि मनोवैज्ञानिक लाभ भी प्रदान करता है। इस लेख में हम जानेंगे कि घर में गीता का पाठ करने से क्या होता है।

ध्यान और शांति का अनुभव गीता का पाठ करने से हमारे अंतरंग में शांति का अनुभव होता है। गीता में दिए गए विभिन्न उपदेश हमें अपने जीवन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं जो हमें सकारात्मक तरीके से सोचने और अपने आसपास के संदर्भों को ध्यान में रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, गीता के अध्ययन से हमें अपने मन को नियंत्रित करना और ध्यान लगाना सीखने में मदद मिलती है।

"जीवन का उद्देश्य: संतुष्टि, समृद्धि और समाज की सेवा"

  मानव जीवन एक अद्वितीय अनुभव है जो हमें इस ब्रह्मांडिक सागर में विशेष बनाता है। हर एक व्यक्ति के जीवन में एक निश्चित उद्देश्य रहता है, जिसक...