ज्ञान मनुष्य के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ज्ञान के बिना मनुष्य अंधकार में घिर जाता है, जबकि ज्ञान के साथ उसकी जीवनशक्ति जाग्रत होती है और वह सही मार्ग पर चल सकता है। भारतीय साहित्य और दर्शन की श्रेष्ठतम ग्रंथों में से एक भगवद गीता में ज्ञान का महत्व विस्तार से वर्णित किया गया है। यह महाकाव्य अर्जुन और भगवान् कृष्ण के बीच हुए एक संवाद के माध्यम से ज्ञान के महत्व को दर्शाता है।
ज्ञान की महत्ता के बारे में भगवान् कृष्ण गीता में कहते हैं "यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।" अर्थात् जो श्रेष्ठ पुरुष कुछ भी करता है दूसरे लोग उसे अनुकरण करते हैं। ज्ञान का अर्थ यहां पर साधारण ज्ञान से अधिक है। यह आध्यात्मिक ज्ञान है जो हमें अपने स्वरूप और धर्म के बारे में शिक्षा देता है। इस प्रकार का ज्ञान श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है और दूसरे लोग उसे अनुसरण करते हैं।



