भगवद गीता भारतीय धर्म और दार्शनिक विचारधारा का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। गीता में अनेक विषयों पर चर्चा की गई है, लेकिन दुख और उसके कारण एक महत्वपूर्ण विषय है। गीता में दुख का कारण बताया गया है और उसके समाधान के लिए भी उपाय बताए गए हैं।
गीता में दु:ख का कारण आसक्ति या मोह है। अपनी आसक्तियों और मोहों से लोग सुख और दुःख दोनों का अनुभव करते हैं। आसक्ति एक ऐसी अवस्था है जिसमें हम अपने विषयों को प्रिय और अप्रिय के रूप में विभाजित करते हैं। हम जो भी विषयों से आसक्त होते हैं, उनसे हमारी आकांक्षाएं और अपेक्षाएं जुड़ जाती हैं। इसलिए, आसक्ति हमारे दुख का मूल कारण है।
