भारतीय साहित्य का एक महानतम ग्रंथ भगवद गीता जिसे 'वेदों की आदि' कहा जाता है, हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र और मार्गदर्शक ग्रंथों में से एक है। इस प्रसिद्ध ग्रंथ का महत्व उन विचारों में छुपा है जो इसमें प्रस्तुत किए गए हैं। भगवद गीता में कुल 18 अध्याय हैं जिनमें समय, स्थान, योग्यता और स्वभाव के आधार पर अलग-अलग योगों की विविध प्रकारों के बारे में विवरण है। इस लेख में हम कुछ महत्वपूर्ण अध्यायों के बारे में चर्चा करेंगे और उनके अर्थ को समझेंगे।
१. अध्याय २: सांख्य योग- इस अध्याय में भगवान् कृष्ण अर्जुन को जीवन के वास्तविक उद्देश्य और आत्मा के अमरत्व के बारे में बोध कराते हैं। इस अध्याय में समस्त विश्व के विकास की सृजनशीलता और परिणाम स्वरूप के बारे में ज्ञान प्रदान किया जाता है। यह अध्याय हमें बताता है कि शरीर की मरण तो हो सकती है, लेकिन आत्मा अमर है और नष्ट नहीं होती।

