"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥"
हम सभी जीवों का जीवन कार्यों से जुड़ा हुआ है। जीवन चक्र के अंतर्गत हम कर्मों के द्वारा अनवरत चलते रहते हैं। कर्म का अर्थ होता है हमारे किए गए कार्य और उनके परिणामों का समूह। यह विचार और सिद्धांत भगवद गीता में अत्यंत महत्वपूर्ण रूप से प्रकट होता है।
भगवद गीता सनातन धर्म का महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे हमारे वैदिक संस्कृति और दार्शनिक विचार की मान्यताओं का प्रमुख स्रोत माना जाता है। इस महाग्रंथ में कर्म के महत्वपूर्ण सिद्धांत का वर्णन किया गया है, जो हमारे जीवन को एक योग्य और उच्चतम दिशा में प्रेरित करने के लिए हमें समर्पित करता है।
